निपुण भारत 2022: कार्यान्वयन प्रक्रिया, नई गाइडलाइन्स पीडीएफ, NIPUN Bharat

निपुण भारत 2022: शिक्षा किसी भी देश के विकास के लिए कितनी आवश्यक है इस बात को समझते हुए हमारे देश की केंद्र सरकार शिक्षा को प्रोत्साहित करती रहती है। समय के साथ साथ शिक्षा के स्तर को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए सरकार शिक्षा नीति में भी बदलाव कर रही है। साथ ही विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सभी छात्रों और अभिभावकों को भी शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करती रही है। जिस से ज्यादा से ज्यादा आबादी और नौनिहाल शिक्षित हो सके। इसी कड़ी में एक और योजना का नाम जुड़ चूका है। इस योजना का नाम निपुण भारत 2022 है। जिसके शुरुआत केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा किया गया है। बता दें की वर्ष 2020 में लायी गयी शिक्षा नीति के बेहतर क्रियान्वयन के लिए NIPUN Bharat Yojana की शुरुआत की गयी है।

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निपुण भारत 2022: कार्यान्वयन प्रक्रिया, नई गाइडलाइन्स पीडीएफ, NIPUN Bharat
निपुण भारत 2022: कार्यान्वयन प्रक्रिया

आज इस लेख के माध्यम से हम आप को NIPUN Bharat Yojana के बारे में सभी आवश्यक जानकरी देंगे। जैसे की – निपुण भारत क्या है ? इसकी कार्यान्वयन प्रक्रिया, विशेषताएं, उद्देश्य, निपुण भारत योजना नई गाइडलाइन्स पीडीएफ आदि सभी तथ्यों के बारे में आप को जानकारी देंगे। जानने के लिए आप हमारे इस लेख को पूरा पढ़ सकते हैं।

Table of Contents

निपुण भारत : NIPUN Bharat Yojana 2022

भारत केंद्र सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में विकास के लिए NIPUN Bharat Yojana 2022 की शुरुआत की है। निपुण भारत की शुरुआत 5 जुलाई 2021 में की गयी है। NIPUN Bharat Mission का पूरा नाम (National Initiative For Proficiency in Reading with Understanding & Numeracy) है। इस योजना में प्री स्कूल के विद्यार्थियों में शिक्षा की नींव को मजबूत बनाया जाएगा और इसके लिए सभी सरकारी और गैर स्कूलों में इस मिशन के अंतर्गत सहयोग प्रदान किया जाएगा। इस योजना का संचालन स्कूल शिक्षा व साक्षारता विभाग द्वारा किया जाएगा। निपुण योजना स्कूली शिक्षा कार्यक्रम समग्र शिक्षा का एक हिस्सा होगी।

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निपुण भारत 2022: कार्यान्वयन प्रक्रिया, नई गाइडलाइन्स पीडीएफ, NIPUN Bharat

निपुण भारत मिशन के अंतरगत सभी बच्चे जो ग्रेड 3 में पढ़ रहे हैं उन्हें कक्षा के अंत तक बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता में निपुण बनाना है। जिससे उन्हें वर्ष 2026 – 2027 तक पढ़ने, लिखने व अंक गणित करने की क्षमता मिल सके। बुनियादी शिक्षा मजबूत होने से छात्रों को आगे के पाठ्यक्रमों के लिए सुविधा हो जाएगी और पहले से बेहतर समझ उत्पन्न होगी। सरकार द्वारा इस निपुण भारत मिशन को पूरे देश में यानी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जल्द ही लागू कर देगी। बता दें की इस मिशन की शुरुआत देश में आयी नई शिक्षा नीति के बेहतर कार्यान्वयन के लिए हुआ है।

Highlights Of NIPUN Bharat Yojana 2022

योजना का नाम निपुण भारत , NIPUN Bharat Yojana
संबंधित विभाग स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग
मंत्रालय शिक्षा मंत्रालय
शुरुआत की गयी 5 जुलाई 2021 , केंद्र सरकार द्वारा
वर्तमान वर्ष 2022
आधिकारिक वेबसाइट यहाँ क्लिक करें

निपुण भारत योजना का उद्देश्य

निपुण भारत मिशन का उद्देश्य कक्षा 3 से कक्षा 6 के छात्रों में आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता का ज्ञान देना है। जिससे उनकी शिक्षा की नींव मजबूत बन सके। बुनियादी ज्ञान मजबूत होना आवश्यक है। आज भी ग्रेड 3 में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए और उनके सम्पूर्ण मानसिक विकास करने के लिए ये आवश्यक है की आज के समय की मांग के अनुसार उन्हें बुनियादी शिक्षा और उसके पाठ्यक्रमों में पारंगत बनाया जाए। इस से सभी छात्रों को आगे की पढ़ाई और पाठ्क्रमों में आसानी हो जाएगी और पहले से ही अन्य जानकारी को समझने में समर्थ हो पाएंगे।

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Annual Status Of Education Report के निष्कर्षों के अनुसार लगातार कई वर्षों से स्कूलों में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने वाले अधिकतर भारतीय छात्र बुनियादी अंक गणित पढ़ और समझ नहीं पाते। इसी तथ्य को ध्यान में रखकर निपुण भारत मिशन की शुरुआत की गयी थी जिससे बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत बना सकें। बता दें की ये योजना शिक्षा की नई नीति के अनुरूप शुरू की गयी है।

ये है कार्यान्वयन प्रकिया

NIPUN Bharat 2022 की शुरुआत देश में लागू क जाने वाली नई शिक्षा नीति के बेहतर क्रियान्वयन के लिए किया गया है। बता दें की इस मिशन (NIPUN Bharat Mission) को देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा। इसके लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5 स्तरीय तंत्र की स्थापना की जाएगी जिसमें राष्ट्रीय, राज्य, जिला, ब्लॉक और स्कूल स्तर पर सञ्चालन होगा। जैसे की हमने लेख में बताया की योजना का संचालन शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा किया जाएगा।

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जानकारी के लिए बता दें कि इस मिशन के अंतर्गत 3 से 9 वर्ष के बच्चों की शिक्षा पर ध्यान दिया जाएगा और उन्हें बेहतर बुनियादी शिक्षाप्रदान की जाएगी। इस मिशन के अंतर्गत वर्ष 2026 – 2027 तक का लक्ष्य रखा गया है। इसके अंतर्गत प्री स्कूल 1, प्री स्कूल 2 और प्री स्कूल 3 (बाल वाटिका ) के बाद ग्रेड 1 , ग्रेड – 2 और ग्रेड 3 की कक्षायें होंगी। इन छात्रों को इन कक्षाओं के दौरान भाषा और गणित का बेहतर ज्ञान दिया जाएगा।

यहाँ जानिये नेशनल मिशन की भूमिका व कार्य के बारे में

इस मिशन के तहत मूलभूत शिक्षा पर ध्यान दिया जाएगा। विद्यार्थियों को बेहतर बेसिक/प्राथमिक शिक्षा प्रदान करके 2021 -2022 के लिए तैयार किया जाएगा। बता दें की इस योजना के लिए मिशन की रणनीती और दस्तावेजों को तैयार किये जाने के साथ साथ स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग शिक्षा मंत्रालय के रूप में कार्य भी करेगा। इस के अतिरिक्त मिशन निदेशक एवं एजेंसी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय स्तर पर कार्यन्वयन किया जाएगा।

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नेशनल मिशन का प्रसाशनिक संचरण (admininstration transmission) : बता दें कि प्रशासनिक संचरण पांच स्तरों पर होता है। इस बारे में आप आगे जान सकते हैं –

  • National Level Mission (राष्ट्रीय स्तर ): ये राष्ट्रिय स्तर पर आयोजित किया जाएगा। इसका सञ्चालन  स्कूल शिक्षा और साक्षारता विभाग द्वारा किया जाएगा। इस के अंतर्गत बच्चों को लर्निंग गैप्स, अस्सेस्मेंट, लर्निंग स्ट्रेटेजी डॉक्युमनेट्स बनाने, लर्निंग मैट्रिक्स तैयार करने जैसे कार्य किये जाएंगे।
  • State Level Mission ( राज्य स्तर पर ) : इसे राज्य स्तर पर आयोजित किया जाएगा। इस स्तर पर सञ्चालन की जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा विभाग की होगी। और इस के लिए स्टेट रिपेयरिंग समिति का गठन किया जाएगा और राज्य स्तर पर कार्यान्वयन राज्य के सेक्रेटरी हेड द्वारा किया जाएगा।
  • District Mission (जिला स्तर पर ) : इस योजना को डिस्ट्रिक्ट लेवल पर संचालित किया जाएगा। इसका सञ्चालन डिप्टी मजिस्ट्रेट और डिप्टी कमिश्नर करेंगे। जिला स्तर पर इस योजना को तैयार करने के लिए जिला शिक्षा ऑफिसर, कमिटी के सदस्य सीईओ, डिस्ट्रिक्ट अफसर ऑफ़ हेल्थ आदि सदस्य बनाए जाते हैं।
  • Block Cluster Mission : इस स्तर पर मिशन के कार्यान्वयन ब्लॉक लेवल पर होता है। इस स्तर पर मिशन का सञ्चालन करने और साथ ही इसकी निगरानी करने की जिम्मेदारी एजुकेशन ऑफिसर और ब्लॉक रिसोर्सेज पर्सन की होती है।
  • Shool Managment Committie & Community Participation : इस मिशन का सञ्चालन स्कूल और कम्युनिटी लेवल पर किया जाएगा। देश भर में शिक्षा अभियान से संबंधित जागरूकता फैलाने का कार्य इस मिशन के माधयम से किया जाएगा। साथ ही मिशन के अंतर्गत स्कूल मैनेजमेंट शिक्षकों और अभिभावकों के द्वारा भी योगदान दिया जाएगा। इससे बच्चों की शिक्षा में सुधार लाने के लिए सभी को इस मिशन के माध्यम से जागरूक किया जाएगा।

निपुण भारत के कार्यान्वयन हेतु जारी किया गया बजट

केंद्र सरकार द्वारा निपुण भारत मिशन की शुरुआत 2020 में लायी गयी नयी शिक्षा नीति के सफलतापूर्वक कार्यान्वयन हेतु की गयी है। केंद्र सरकार ने इसके लिए अच्छा ख़ासा बजट जारी किया है। जानकारी के लिए बता दें की NIPUN Bharat Mission के सफलतापूर्वक कार्यान्वयन हेतु वर्ष 2021 -2022 के लिए राज्य और केंद्र शाषित प्रदेशों को देश भर में समग्र शिक्षा योजना के तहत 2688.18 करोड़ रूपए प्रदान करने की मंजूरी दी है। ये रकम आधारभूत चरण हेतु विभिन्न उपायों को लागू करने के लिए है। जिससे बच्चों को योजना के तहत बेहतर बुनियादी शिक्षा मिल सकेगी और वो आगे के पाठ्यक्रमों के लिए तैयार हो सकेंगे। अभी सरकार का लक्ष्य इसे 2026 -2027 तक पूरा करना है।

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क्या होती है बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता ?

हमने अभी तक जाना की NIPUN Bharat Mission के तहत सभी सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में बुनियादी शिक्षा को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण बनाया जाएगा। जिस से सभी छात्र और छात्राओं को भाषा और संख्यात्मक ज्ञान प्राप्त होगा। आखिर ये आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता है क्या ? इसे ऐसे समझ सकते हैं – दरअसल बुनियादी साक्षरता वो योग्यता है जिसके माध्यम से विद्यार्थी पढ़ने लिखने , बोलने और व्याख्या करने में सक्षम होता है। वहीँ मूलभूत संख्यात्मकता संख्यात्मक विधियों और विश्लेषण का उपयोग करके दिन-प्रतिदिन की समस्याओं को हल करने की क्षमता है। इसी ज्ञान के आधार पर विद्यार्थी आगे की शिक्षा को ग्रहण कर सकता है। ये बुनियादी ज्ञान मुख्यतः बच्चों को ग्रेड – 3 तक प्राप्त करना होता है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा इसी तथ्य को ध्यान में रखकर कक्षा 3 तक के विद्यार्थियों के लिए निपुण भारत के अंतर्गत बुनियादी शिक्षा की नींव मजबूत करने का प्रावधान किया है।

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यहाँ जानिये आधारभूत साक्षरता तथा संख्यामकता के प्रकार

आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता के कितने प्रकार हैं। आप इन्हे यहाँ से समझ सकते हैं।

मूलभूत भाषा एवं साक्षरता

  • मौखिक पठन प्रवाह
  • धवनियात्मक जागरूकता
  • लेखन
  • शब्दावली
  • रीडिंग कंप्रीहेंशन
  • मौखिक भाषा का विकास
  • प्रिंट के बारे में अवधारणा
  • डिकोडिंग
  • कल्चर ऑफ रीडिंग

मूलभूत संख्यामकता और गणित कौशल

  • गणितीय तकनीकें
  • पूर्व संख्या अवधारणाएं
  • आकार एवं स्थानिक समाज
  • मापन
  • नंबर एंड ऑपरेशन ऑन नंबर
  • पैटर्न

NIPUN Bharat Mission द्वारा साक्षरता व संखायात्मकता में किए जाने वाले सुधार

निपुण भारत मिशन के तहत देश की शिक्षा नीति में सुधार किया जाएगा। जैसे की आप ने जाना की इस मिशन की शुरुआत देश की नयी शिक्षा नीति के बेहतर कार्यान्वयन हेतु लाई गयी है। यहाँ जानिये क्या के बदलाव किये जाने हैं –

  1. विद्यार्थियों को शिक्षा में प्रोत्साहन देना : जैसे की सभी जानते होंगे की छोटे बच्चे बचपन में जल्दी सीखते हैं और इस उम्र में उन्हें जो भी सिखाये वो जल्दी और लम्बे समय के लिए उन सब बातों को आत्मसात कर लेते हैं। ऐसे में आवश्यक है की उन्हें सीखने की उम्र में अध्यापकों द्वारा ज्यादा ध्यान दिया जाये। बच्चों को ज्यादा से ज्यादा आधारभूत साक्षरता के साथ सामाजिक ज्ञान भी प्रदान किया जाये। बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए आवश्यक है कि निम्नलिखित बातों का भी ध्यान रखें –
    • लिंगभेद से मुक्त पुस्तके, चित्र, पोस्टर, खिलौने आदि के माध्यम से शिक्षित करें।
    • बालक और बालिकाओं से उचित और समान अपेक्षाओं को प्रदर्शित करें।
    • विद्यार्थियों को उनकी रूचि के अनुसार शिक्षा में प्रोत्साहित करना।
    • ऐसे पाठ्यक्रम (कहानिया और कविताएं ) जिनमे छात्र और छात्राओं को समान भूमिकाओं में पेश किया जा सके।
    •  लिंग पक्षपाती कथनों का कक्षा में किसी भी प्रकार से प्रयोग न किये जाने का प्रयास करना।
  2. लर्निंग अस्सेस्मेंट : लैंनिंग अस्सेस्मेंट मतलब बच्चों की सीखने की क्षमता का आकलन करना होता है। इसके लिए उनके द्वारा सीखे गए विभिन्न पाठ्यक्रमों में उनके विकास का आकलन किया जाता है जिससे बच्चे की सीखने की क्षमता को ट्रैक किया जा सके। इस के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जाता है। इस के माध्यम से बच्चों की रूचि का पता लगाया जा सकता है। और साथ ही उन्हें उनकी रूचि के अनुसार ही प्रोत्साहित किया जा सकता है। इस के अतिरिक्त बच्चे को कहाँ समस्या हो रही है , इसका भी पता किया जा सकता है और बच्चे की मदद की जा सकती है।
  3. विद्यालय मॉडल : इस मॉडल के अनुसार ये बहुत आवश्यक है की बच्चे को स्कूल भेजा जाए। ऐसा इसलिए क्यूंकि बच्चे स्कूल जाने पर न सिर्फ शिक्षा प्राप्त करते हैं बल्कि उन्हें स्कूल जाकर अपने साथ के बच्चों , शिक्षकों और अन्य सहयोगियों से भी सीखने का अवसर मिलता है। जिस से बच्चे का सम्पूर्ण विकास सम्भव है।
    • आप की जानकारी के लिए बता दें की एनईपी (नेशनल एजुकेशन पॉलिसी) के अंतर्गत एक 3 माह का स्कूल प्रिपरेशन मॉड्यूल निर्धारित किया गया है।  जिसके माध्यम से बच्चे प्री स्कूल शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। जिससे उन्हें आगे स्कूल जाने में कोई परेशानी न हो। क्यूंकि स्कूल जाने के लिए आवश्यक है की बच्चे के पास न्यूनतम कौशल एवं ज्ञान हो।

निपुण भारत 2022 के हितधारकों की सूची

1.CBSE (सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन)
2.राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश (States & UTs)
3.स्टेट काउंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग
4.सेंट्रल स्कूल आर्गेनाइजेशन
5.नेशनल काउंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग
6.मुख्य शिक्षक
7.कम्युनिटी एवं पैरेंट
8.डिस्ट्रिक्ट इंस्टिट्यूट ऑफ़ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग
9.ब्लॉक रिसर्च सेंटर तथा क्लस्टर रिसोर्सेज सेंटर
10.डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर एवं ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर
11.सिविल सोसाइटी आर्गेनाइजेशन
12.प्राइवेट स्कूल
13.गैर सरकारी संगठन (Non Government Organization)

NIPUN Bharat Mission के भाग

निपुण भारत योजना को सरकार द्वारा 17 भागों में विभाजित किया गया है। यह भाग कुछ इस प्रकार है।

  • परिचय
  • मूलभूत संख्यामकता और गणित कौशल
  • मूलभूत भाषा और साक्षरता को समझना
  • शिक्षा और सीखना: बच्चों की क्षमता और विकास पर ध्यान
  • योग्यता आधारित शिक्षा की ओर स्थानांतरण
  • लर्निंग एसेसमेंट
  • शिक्षण -अधिगम प्रक्रिया: शिक्षक की भूमिका
  • राष्ट्रीय मिशन: पहलू एवं दृष्टिकोण
  • स्कूल की तैयारी
  • मिशन की सामरिक योजना
  • मिशन कार्यान्वयन में विभिन्न हितग्राहियों की भूमिका
  • SCERT और DIET के माध्यम से शैक्षणिक साहित्य
  • दीक्षा/NDEAR का लाभ उठाना , डिजिटल संसाधनों का भंडार
  • निगरानी और सूचना प्रौद्योगिकी ढांचा
  • मिशन की स्थिरता
  • माता पिता एवं सामुदायिक जुड़ाव
  • अनुसंधान, मूल्यांकन एवं दस्तावेजी करण की आवश्यकता

निपुण भारत 2022 का राष्ट्रीय परिदृश्य

निपुण भारत की शुरुआत देश में बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए की गयी है। जिसका मुख्य उद्देश्य वर्तमान की पीढ़ी को गुणवत्ता करना है। जिससे उनकी शिक्षा उनके हर परिदृश्य में काम आये।

  1. शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान देना
  2. शिक्षा की पहुँच पर ध्यान देना
  3. बच्चों के सीखने के परिमाण पर ध्यान
  4. सीखने के परिमाणों की उपलब्धि का मापन करना

बुनियादी साक्षरता एवं संख्यामकता पर राष्ट्रीय मिशन

देश में नई शिक्षा व्यवस्था के सफलतापूर्वक कार्यावयन के लिए निपुण भारत योजना को लाया गया है। बता दें की मूलभूत साक्षरता का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए नेशनल एजुकेशन पॉलिसी एवं अंतर्मनिर्भार भारत कैंपेन के अंतर्गत मूलभूत साक्षरता एवं संख्यामकता पर एक राष्ट्रीय मिशन को शुरू करने का निर्धारण किया गया है। जैसे की लेख में आप ने मिशन के उद्देश्य को 2026-27 तक प्राप्तकरने का निर्णय लिया गया है, जिसकी पूर्ती के लिए गुणवत्तपूर्ण शिक्षा प्रदान की जाएगी। ग्रेड 3 के अंत तक बच्चों को, जिनकी उम्र 3 वर्ष से लेकर 9 वर्ष तक की होगी, उन्हें शामिल किया गया है। इसमें उन्हें मूलभूत साक्षरता तथा संख्यामकता का ज्ञान प्रदान किया जाएगा।

मूलभूत भाषा एवं साक्षरता की आवश्यकता

  1. भाषा- साक्षरता एवं गणितीय कौशल की एक मजबूत नींव का प्रारंभिक वर्षों में विकास करना बहुत आवश्यक है जिस से बच्चे भविष्य में बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सके।
  2. विद्यार्थियों के शारीरिक विकास के साथ साथ मस्तिष्क के विकास के लिए प्रारंभिक साक्षरता का विकास होना भी बहुत महत्वपूर्ण होता है।
  3. छात्रों को मूलभूत भाषा एवं साक्षरता प्रदान करने के बाद बच्चे समझ के साथ पढ़ सकते है। ऐसा मथुरा पायलट प्रोजेक्ट के निष्कर्षों के अनुसार कहा गया है।
  4. प्रारंभिक मूलभूत भाषा एवं साक्षरता बच्चों को शुरआती वर्षों में प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है। ऐसा इसलिए क्यूंकि बच्चों के मस्तिष्क का 85% विकास 6 वर्ष की आयु तक हो जाता है। और तबतक उन्हें मूल भूत शिक्षा मिल जानी चाहिए।

प्रारंभिक भाषा और साक्षारता सिर्फ बोलना, पढ़ना और सुनना ही नहीं होता। बल्कि इस के माध्यम से व्यक्ति अपने आसपास के बारे में समझ विकसित करता है और उस बारे में अपनी एक सोच बनाता है। ये बहुत आवश्यक है की ये बुनियादी साक्षारता उन्हें शुरूआती वर्षों में ही मिल जाए, जिससे उन्हें आगे जाकर अपनी समझ विकसित कर ले जिस से उन्हें आगे जाकर कोई परेशानी न हो। प्रारंभिक भाषा और साक्षारता में नीचे दिए गए पॉइंट्स को ले सकते हैं –

  1. पढ़ने और लिखने का ज्ञान होना।
  2. अपनी क्लास में लिखने की अवधारणा (Concept )
  3. प्रारंभिक शिक्षा की अवधि के दौरान लिखने का कौशल इमर्जेंट राइटिंग, कन्वेंशनल राइटिंग एवं राइटिंग कंपोजिशन के माध्यम से विकसित करना।

ये हैं मूलभूत भाषा एवं साक्षरता के प्रमुख घटक

  • रीडिंग कंप्रीहेंशन
  • प्रिंट के बारे में अवधारणा
  • लेखन
  • मौखिक भाषा का विकास
  • शब्दावली
  • धावनी के माध्यम से जागरूकता
  • डिकोडिंग
  • पढ़ने का प्रभाव
  • पढ़ने की संस्कृति

कुछ महत्वपूर्ण कदम भाषा और साक्षरता विकास को बढ़ाने के लिए

  • कहानियां एवं कविताएं सुनना, बताना और लिखना
  • सॉन्ग एंड राइम्स
  • अनुभव साझा करना
  • एक प्रिंट समृद्धि वातावरण बनाना
  • ऊंचे स्वर में पढ़ना
  • ड्रामा और रोल प्ले
  • पिक्चर रीडिंग
  • शेयर ट्रेडिंग
  • कक्षा की दीवारों का उपयोग करना
  • अनुभव आधारित लेखन
  • मिड डे मील

मूलभूत संख्यामक और गणित कौशल

इस का अर्थ हुआ दैनिक जीवन में आने वाली समस्याओं का समाधान करने और उस में में तर्क करने और संख्यामकता अवधारणा को लागू करने की क्षमता होना। जान छात्र निम्नलिखित कौशल प्राप्त कर लेते हैं तब उनमे मूलभूत संख्यात्मक और गणित कौशल की समझ आ जाती है।

  • कम या ज्यादा एवं छोटा या बड़ा की समझ विकसित करना
  • एकल वस्तु एवं वस्तुओं के समूह के बीच संबंध स्थापित करने की क्षमता
  • मात्राओं की समझ
  • मात्राओं का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रतियों का उपयोग करना
  • संख्याओं की तुलना करना आदि

आवश्यकता प्रारंभिक गणित कौशल की

  • विद्यार्थियों द्वारा संख्याओं और स्थानिक समझ का दैनिक जीवन में उपयोग जा सकता है।
  • दैनिक जीवन में तार्किक सोच और तर्क को विकसित कर सकते हैं
  • प्रारंभिक वर्षों के दौरान गणितीय कौशल महत्वपूर्ण होता है।
  • आधारभूत संख्यमकता का रोजगार में एवं घरेलू स्तर पर योगदान

प्रारंभिक गणित के प्रमुख घटक

  • नंबर एंड ऑपरेशन ऑन नंबर
  • फ्री नंबर अवधारणाएं
  • डाटा संधारण
  • आकार एवं स्थानिक समझ
  • माप तोल
  • पैटर्न
  • गणितीय संचार

निपुण भारत मिशन 2022 से समबन्धित प्रश्न उत्तर

NIPUN Bharat 2022 का पूरा नाम क्या है ?

इस मिशन का पूरा नाम National Initiative For Proficiency in Reading with Understanding & Numeracy है।

निपुण भारत मिशन 2022 की शुरुआत कब हुई ?

NIPUN भारत को शिक्षा विभाग द्वारा 5 जुलाई 2021 को आरम्भ किया गया।

NIPUN Bharat 2022 का मुख्य उद्देश्य क्या है ?

प्री-स्कूल (ग्रेड-3) के 4 से 10 वर्ष की आयु छात्रों को आधारभूत साक्षारता और संखायात्मकता ज्ञान प्रदान कर उन्हें लिखना, पढ़ना व अंकगणित करने की क्षमता में सुधार करना है।

निपुण भारत मिशन 2022 प्रमुख कंपोनेंट्स क्या हैं ?

डाटा संधारण, गणितय संचार, पैटर्न, मापतोल, नंबर एंड ऑपरेशन ऑन नंबर पैटर्न्स आदि, और मूल भूत भाषा एवं साक्षारता केमौखिक भाषा को विकास, रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन, लेखन, शब्दावली, डिकोडिंग आदि है।

इस लेख के माध्यम से हमने आप को निपुण भारत मिशन 2022 के बारे में सभी आवश्यक जानकारी देने का प्रयास किया है। उम्मीद है आप को लेख में दी गयी जानकारी उपयोगी लगी होगी। यदि आप को इस लेख से संबंधित कोई अन्य जानकारी चाहिए तो आप नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स के माध्यम से पूछ सकते हैं।

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1 thought on “निपुण भारत 2022: कार्यान्वयन प्रक्रिया, नई गाइडलाइन्स पीडीएफ, NIPUN Bharat”

  1. A good mission for learners, we want that students learn better for futer, and live update, thank for this programme.

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