कर्मचारी की मृत्यु पर पत्नी और बच्चों को पेंशन दिलाती है ये स्कीम, जानिए नियम-शर्तों को विस्तार में

EPFO Family Pension: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) देश के सरकारी कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद उनके भविष्य के लिए धन की बचत करने हेतु उनके EPF खाते में वेतन के कुछ हिस्से से बचत करने के लाभ देता है, जिससे कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद पेंशन व पीएफ जैसी बहुत सी सुविधाओं का लाभ प्राप्त होता है। इससे कर्मचारी नौकरी पूरी होने के बाद बिना किसी आर्थिक समस्या के रिटायरमेंट के बाद प्रतिमाह पेंशन का लाभ प्राप्त कर आराम की जंदगी जी सकेंगे, यह लाभ कर्मचारी की मृत्यु के बाद भी बंद नहीं होता बल्की फैमिली पेंशन (EPFO Family Pension) के रूप में कर्मचारी के आश्रितों को भी प्रदान किया जाता है।

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EPFO Family Pension: कर्मचारी की मृत्यु पर पत्नी और बच्चों को पेंशन दिलाती है ये स्कीम, जानिए नियम-शर्तों को विस्तार में

ईपीएफओ फॅमिली पेंशन

जैसा की हमने आपको बताया की ईपीएफ संगठित क्षेत्रों से जुड़े कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए पेंशन व पीएफ स्कीम का लाभ प्रदान करवाता है, इसके लिए नौकरीपेशा कर्मचारियों के वेतन से ईपीएफ में हर महीने 12 फीसदी योगदान जाता है। ईपीएफ में किए जाने वाले निवेश से 8.33 ईपीएस में जाता है, जिसमे कुछ योगदान सरकार की तरफ से भी जाता है जो कर्मचारी को मिलने वाली बेसिक पेंशन के 1.16 फीसदी या इससे अधिक नहीं होता। ईपीएफ सर्विस मेंबर की मृत्यु के बाद उसके परिवार को पेंशन का लाभ दिया जाता है, जिसकी जानकारी खुद ईपीएफओ द्वारा ट्वीट करके अपने कर्मचारियों को EPS95 स्कीम के तहत दी गई है।

कर्मचारी की मृत्यु पर पत्नी और बच्चों को पेंशन दिलाती है ये स्कीम

EPS95 स्कीम (EPFO Family Pension) के अंतर्गत EPFO से पंजीकृत कर्मचारी जिनकी सर्विस के दौरान या पेंशनर होने पर मृत्यु हो जाती है, तो इस उनके बाद उनकी पत्नी और बच्चों को पेंशन का लाभ प्रदान किया जाता है। यदि उनकी मृत्यु सर्विस पीरियड में होती है तो ऐसे में उनकी पत्नी कम से कम 1000 रूपये तक की विधवा पेंशन प्राप्त करने के पात्र होंगी और यदि किसी पेंशनर की मृत्यु हो जाती है, तो उनकी पेंशन का 50 फीसदी हिस्सा उनकी पत्नी या पति को दिया जाता है।

कर्मचारी को कब होंगे पेंशन के हकदार

ईपीएफ के तहत पंजीकृत कर्मचारियों को पेंशन का लाभ लेने के लिए कर्मचारी की आयु 50 वर्ष से अधिक होनी चाहिए और उन्हें कम से कम 10 साल की सर्विस करना जरुरी है, यदि कर्मचारी 9 साल 6 महीने नौकरी करते हैं तो भी उनकी सर्विस 10 साल ही मानी जाती है। इसके अलावा कर्मचारी को 50 से 58 साल के बीच पेंशन चुनने का विकल्प दिया जाता है, लेकिन उसमे उन्हे पूरी पेंशन का लाभ नहीं दिया जाता।

फैमिली पेंशन पाने की नियम व शर्तें

फैमिली पेंशन का लाभ प्राप्त करने के लिए कुछ न्यायम व शर्तें लागू की गई हैं, जिन्हे पूरा करने पर ही कर्मचारी के परिवार को पेंशन का लाभ प्रदान किया जाएगा जिसकी जानकारी कुछ इस प्रकार है।

  • EPS स्कीम (EPFO Family Pension) के अंतर्गत कर्मचारी के बाद उनकी पेंशन के हकदार उनके पति या पत्नी में से कोई एक और उनके बच्चे होते हैं।
  • यदि कर्मचारी अविवाहित है, तो उनके द्वारा चयनित उनके परिवार के नॉमिनी को यह लाभ दिया जाता है।
  • कर्मचारी के केवल जीवन साथी के ना होने पर उनके दो बच्चो (सगे या क़ानूनी रूप से गोद लिए) दोनों के 25 वर्ष की आयु पूरी होने तक उन्हें पेंशन का 75 फीसदी हिस्से का लाभ प्रदान किया जाता है।
  • यदि कर्मचारी के बच्चे शारीरिक रूप से विकलांग हैं तो ऐसी स्थिति में पेंशन का लाभ जीवनभर दिया जाता है।
  • स्कीम के तहत सर्विस एम्प्लोयी की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी को मासिक विधवा पेंशन के तहत 1000 रूपये पेंशन का लाभ प्रतिमाह दिया जाता है।
  • कर्मचारी द्वारा पेंशन के किसी नॉमिनी का चयन ना किए जाने पर उसके माता-पिता को पेंशन प्रदान की जाती है।

यदि किसी की पत्नी हो तो

अगर किसी कर्मचारी की एक से अधिक (दो पत्नी) हो तो ऐसे में पेंशन कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसकी पेंशन का हक़ पहली पत्नी को दिया जाता है और पहली पत्नी के बाद पेंशन की हकदार दूसरी पत्नी होती है।

यदि पति या पत्नी दूसरी शादी करते हैं तो

यदि कर्मचारी की पेंशन का लाभ पाने से पहले ही मृत्यु हो जाती है, और उनके जीवनसाथी (पति या पत्नी) दूसर शादी कर लेते हैं तो ऐसे में पेंशन का लाभ प्राप्त करने के लिए हकदार नहीं रह जाते, यह लाभ कर्मचारी के बच्चों को 25 वर्ष की आयु तक प्रदान किया जाता है।

नॉमिनी का चयन ना किए जाने की स्थिति में

EPFO द्वारा कमचारियों को 31 दिसंबर से पहले पहले पीएफ में नॉमिनी का नाम जोड़ने के निर्देश दिए गए थे, जिसके बीच में जिन कर्मचारियों द्वारा नॉमिनी का चयन नही किया गया था, उन्हें परिवार के एक से अधिक सदस्यों को नॉमिनी के रूप में चयन करना आवश्यक था। लेकिन बहुत से कर्मचारी जिनके द्वारा दिए गए समय के बीच भी नॉमिनी का चयन नहीं किया गया तो ऐसे में एम्प्लोयी के माता या पिता को जीवन भर पेंशन व पीएफ का लाभ प्रदान किया जाता है।

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