27 हजार से अधिक शिक्षकों को टैबलेट का पैसा देने की तैयारी

अगर आप भी उत्तराखंड राज्य के शिक्षक है तो यह खबर आपके लिए बहुत ही ख़ुशी की हो सकती है। जी हां, सरकार राज्य के सभी सरकारी प्राइमरी (प्राथमिक) स्कूल्स में पढ़ा रहे 27 हजार से भी ज्यादा टीचर्स को टेबलेट के पैसे देने की तैयार में जुटी हुई है। श्री बंसीधर तिवारी जो कि समग्र शिक्षा अभियान के स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर (राज्य परियोजना निदेशक) है उनके मुताबित केंद्र सरकार के दिशा निर्देशों पर एनुअल प्लान तैयार किया जा रहा है। इस प्लान में एक प्लान प्राइमरी टीचर्स को टेबलेट देने का प्रस्ताव भी शामिल है। चलिए जानते है इससे जुडी और अधिक जानकारियों को।

बता दें, केंद्र सरकार की तरफ से जारी गाइडलाइन्स में भी प्राइमरी टीचर्स को टेबलेट के पैसे प्रदान करने की बात कही गयी है इस बात की जानकारी खुद शिक्षा महानिदेशक ने बताई है। इसी नोटिफिकेशन के चलते डिपार्टमेंट की तरफ से प्रपोजल तैयार हो रहा है। सरकार ने सभी अधिकारियों को यह आदेश दिए है कि निर्धारित समय में वर्षित प्लान तैयार किया जाएं। जिन भी प्राइमरी टीचर्स को टेबलेट दिए जायेंगे वह उसका उपयोग केवल पढाई के लिए करेंगे।

टेबलेट के लिए मिलेंगे इतने रुपये

राज्य सरकार का कहना है कि यदि सरकार ने टेबलेट बाँटने की मंजूरी दे दी तो हर एक प्राइमरी टीचर को 10 हजार रुपये की धनराशि प्रदान की जाएगी। डायरेक्टर जनरल ऑफ़ एजुकेशन (शिक्षा महानिदेशक) का कहना है कि एनुअल प्लान में सोलर पैनल, नयी स्कूल बिल्डिंग, प्रयोगशाला (laboratory) आदि को भी शामिल किया गया है। 25 मार्च तक यह वार्षिक प्लान और 5 साल का प्रोपोसड प्लान बनकर केंद्र सरकार तक पहुँच जायेगा।

निर्धारित समय पर प्लान पूरे होने के निर्देश

22 फरवरी 2022 यानी मंगलवार के दिन एनुअल प्लान और 2022-23 के बजट के संबंध में शिक्षा महानिदेशक बंसीधर तिवारी जी ने अन्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। बता देते है, इस बैठक में उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्धारित किये गए समय पर एनुअल प्लान तैयार करने के आदेश दिए है। इस मीटिंग में उप शिक्षा अधिकारी (डिप्टी एजुकेशन ऑफिसर) से लेकर अपर निदेशक (एडिशनल डायरेक्टर) एवं डायरेक्टर लेवल के सभी ऑफिसर शामिल थे।

यह तो आप सभी जानते है, की देश में जितने प्राइवेट या सरकार स्कूल है वहां पढाई के तरीके में कितना बड़ा अंतर है। सरकार द्वारा दिए जाने वाले टेबलेट का सही तरह से उपयोग तभी हो पायेगा जब छात्रों के पास ऑनलाइन पढाई करने के लिए किसी तरह की सुविधा उपलब्ध होगी। परन्तु कोरोना महामारी के कारण स्कूल बंद होने के बाद यह देखा गया है कि सरकारी स्कूल के कई सारे छात्र ऐसे में भी जिनके पास ऑनलाइन पढाई करने के लिए किसी तरह के कोई भी साधन उपलब्ध नहीं है।

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