विज्ञानिको ने खोला रामसेतु के लाखों वर्षों का राज, आखिर पानी के ऊपर क्यों तैरते थे राम नाम के पत्थर

रामायण के रातसेतु की जानकारी:- दोस्तों रामायण की कथा से तो आप सभी भली-भाति परिचित होंगे। इस कथा में रामायण के युद्ध के दौरान आपने इसके रामसेतु पुल के बारे में भी सुना होगा, जसिके निर्माण के पीछे कहानी की शुरुआत रावण द्वारा माता सीता के हरण कर लेने से होती है, तब भगवान श्री राम की सेना को लंका जाने के लिए समुद्र में इस पुल का निर्माण करना पड़ा था, जिसमे पुल निर्माण का कार्य नल और नील दो वानरों द्वारा पूरी सेना के साथ मिलकर किया गया। जिसमे रास्तेउ पुल के लिए उपयोग होने वाले पत्थरों पर श्री राम का नाम लिखने पर यह पत्थर समुद्र में तैरने शुरू हो गए थे, जो की आज के समय तक वैज्ञानिक तौर पर रहस्य बना हुआ थी की पानी में पत्थर कैसे तैर सकते है ? जिसका राज अब विज्ञानिको द्वारा पता लगा लिया गया है, तो चलिए जानते हैं क्या है रामसेतु के लाखों वर्षों का राज।

विज्ञानिको ने खोला रामसेतु के लाखों वर्षों का राज

रामायण की प्रचलित कहानी में रामसेतु पुल की एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण भूमिका देखी जाती है, इस पुल को वानर सेना द्वारा 5 दिन में बनाकर तैयार किया गया था, जिसकी बारे में यह माना जाता है की इसकी लम्बाई 30 किलोमीटर और चौड़ाई 3 किलोमाटर की है, इस पुल के निर्माण में उपयोग होने वाले पत्थर के डूबने के बजाय इनके तैरने के पीछे धार्मिक मान्यताओं के आधार पर यह माना जाता है की इन पत्थरों में श्री राम का नाम होने से यह पत्थर पानी में तैरने लगे लेकिन काफी समय से इन पत्थरों पर शोध कर रहे दुनियाभर के वैज्ञानिकों द्वारा इन पत्थरों के तैरने के पीछे आधुनिक विज्ञान की रिसर्च में इनके तैरने की असली वजह का खुलासा किया गया है, जानते हैं क्या है इन पत्थरों के पीछे का वैज्ञानिक कारण।

जानिए आखिर पानी के ऊपर क्यों तैरते थे राम नाम के पत्थर

रामसेतु पत्थरों के तैरने के पीछे वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध में यह पता लगा है, की पुल में उपयोग होने वाले पत्थर बेहद ही खास किस्म ज्वालामुखी से निकलने वाले लावा से बनने वाले पत्थर है जिन्हे प्यूमाइस स्टोन (Pumice Stone) के नाम से जाना जाता है। जो आकार में बेहद अलग और वजन में अन्य पत्थरों से हलके होते हैं, इन पत्थरों का निर्माण ज्वालामुखी के निकलने वाले गर्म लावा के वातावरण में मौजूद ठंडी व कम तापमान वाली गर्म हवा और पानी के आपस में मिलने से होता है, जिससे इन पत्थरों में कई छेद हो जाते हैं और यह स्पंज जैसे दिखने लगते हैं, इन पत्थरों में बने छेदों के कारण यह इन पत्थरों को पानी में हल्का बना देते हैं, जिससे यह पानी में डूबते नहीं है, यह है इन पत्थरों के तैरने की असली वैज्ञानिक राज।

इस पुल के बनने में इस्तेमाल हुए पत्थरों के पीछे इस रहस्य का पता आज वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में उभरकर आई है, जिसका पता काफी वर्षों से लगाने की कोशिश कर रहे विज्ञानिक ने आखिर लगा ही लिया है, जिससे केवल धार्मिक मान्यताओं में विश्वास रखने के अलावा अब लोग इसके आधुनिक विज्ञानिक कारण जान सकेंगे।

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