HDFC Bank के 40 अरब डॉलर के मर्जर को लग सकता जोर का झटका, जानें क्यों?

एचडीएफसी बैंक द्वारा हाउसिंग लोन कंपनी एचडीएफसी के साथ 40 अरब डॉलर के मर्जर को वित्तीय रेगुलेटरी के अंतर्गत मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इसका मुख्य कारण विश्लेषकों द्वारा द्वारा बैंको को बीमा सेक्टर में हिस्सेदारी देने को बताया जा रहा है। दरअसल एचडीएफसी बैंक समूह का सबसे बड़ा शेयरधारक है ऐसे में मर्जर के कारण इंसोरेंस में भागीदारों को लेकर इसे रेगुलेटरी प्रोसेस से गुजरना पड़ेगा। इससे पहले HDFC Bank द्वारा अपनी पैरेंट आर्गेनाईजेशन के साथ 40 अरब डॉलर के आल स्टॉक अधिग्रहण के लिए शेयर की कीमतों में तेजी के कारण मंजूरी प्रदान की गयी है। हालांकि अब विश्लेषक इस सौदे में रुकावट की आशंका जता रहे है जिससे की अधिग्रहण में समय लगने के सम्भावना है।

आसान नहीं होगा संचालन

आपको बता दे की एचडीएफसी लिमिटेड और एचडीएफसी बैंक के विलय को देश में फाइनेंशियल सेक्टर में बहुत बड़ा सौदा माना जा रहा है। फाइनेंशियल सेक्टर में एचडीएफसी लिमिटेड बहुत बड़ी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी है ऐसे में वित् रेगुलेटरी के तहत कंपनी को बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। देश के वित्तीय संचालन को रेगुलेट करने वाले रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा भी कंपनी को एचडीएफसी लिमिटेड को बैंक के साथ मर्जर करने पर हिस्सेदारी को कम करने को कहा गया है। वर्तमान सौदे के अनुसार बैंक में एचडीएफसी लिमिटेड की 41 फीसदी हिस्सेदारी होगी जिससे की RBI द्वारा संचालन की दृष्टि से सहज नहीं माना जा रहा है। साथ ही विलय के बाद शशिधर जगदीशन जो की वर्तमान में एचडीएफसी बैंक के प्रमुख है विलय के बाद भी प्रमुख ही बने रहेंगे। इससे रिज़र्व बैंक द्वारा कंपनी के संचालन को लेकर आशंका जाहिर की गयी है।

ये रहेगी एचडीएफसी बैंक की हिस्सेदारी

एचडीएफसी बैंक द्वारा 28 वर्ष पूर्व एचडीएफसी लिमिटेड को एक हाउसिंग लोन देने वाली कंपनी के रूप में स्थापित करने में वित्तीय सहायता दी गयी थी। वर्तमान में इसका कुल सम्पति प्रबंधन मूल्य 5.26 ट्रिलियन रुपये के करीब है। हाल ही में कंपनी के शेयर में विलय की घोषणा के बाद तेजी दर्ज की गयी है ऐसे में इसके मार्केट कैप में भी बढ़ोतरी की आशंका है। इस मर्जर के बाद कंपनी की एचडीएफसी बैंक में हिस्सदारी 41 फीसदी हो जाएगी जिससे की HDFC बैंक 100 फीसदी हिस्सेदारी के साथ पूर्ण रूप से पब्लिक होल्डिंग कंपनी बन जायेगी। साथ ही एचडीएफसी लिमिटेड के शेयरधारको को 25 शेयर के बदले में विलय सौदे के तहत एचडीएफसी बैंक के 42 शेयर प्राप्त होंगे। हालांकि इस विलय के अगले वित्तीय वर्ष 2023-24 के तहत तीसरी तिमाही के दौरान पूरा होने की उम्मीद है।

नेगेटिव बैलेंस सीट का असर

इस विलय सौदे के बारे में विश्लेषकों द्वारा एचडीएफसी बैंक के अधीन विभिन सहायक कंपनियों को लाये जाने पर नेगेटिव बैलेंस सीट की आशंका जताई जा रही है। इसका कारण सौदे के पश्चात कंपनी को होल्डिंग कंपनी स्ट्रक्चर में ढालना होगा जिससे की बैंक की बैलेंस सीट पर असर पड़ेगा। वही सौदे के बारे में बात करते हुये घरेलू ब्रोकरेज हाउस के विश्लेषक ने कहा है की कई कंपनी के मर्ज से नियामक सम्बंधित बाधाये आ सकती है। इसी सम्बन्ध में बैंक के मैनेजमेंट से नियामक सम्बंधित नियमो के स्पष्टीकरण को लेकर आरबीआई द्वारा जवाब तलब किया गया है।

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