Pulitzer Price: जानें कौन है दानिश सिद्दीकी? Danish Siddiqui Pulitzer Prize photo

Pulitzer Price : पुलित्ज़र प्राइज काफी सम्मानित पुरूस्कार है। इस बार फीचर फोटोग्राफी श्रेणी में प्रतिष्ठित पुलित्ज़र पुरूस्कार (Pulitzer Price) दानिश सिद्दीकी समेत चार भारतीयों को प्रदान किया गया है। इस बार पुलित्ज़र पुरूस्कार से सम्मानित किये जाने वाले भारतीय विजेताओं की सूची में राइटर्स के फोटोग्राफर दानिश सिद्दीकी के साथ साथ , अदनान आबिदी सना इरशाद मट्टू , अमित दवे नाम भी शामिल है। इन्हे भारत में कोविड – 19 के दौरान हुई मौतों (Covid -19 Deaths in India ) से जुडी तस्वीरों के लिए पुलित्ज़र प्राइज दिया गया है।

Pulitzer Price

पुलित्जर पुरस्कार पत्रकारिता के क्षेत्र में दिया जाने वाला अमेरिका का सर्वोच्च पुरस्कार है। इस पुरस्कार की शुरुआत 1917 से हुई थी। इस पुरूस्कार को कुल 21 केटेगरी / क्षेत्र / श्रेणियों में दिया जाता है। इसमें 20 श्रेणियों में इसे जीतने वाले व्यक्ति को अपने उत्कृष्ट कार्य हेतु एक सर्टिफिकेट , 1500 यूएस डॉलर नकद पुरूस्कार प्रदान किया जाता है। बता दें की ये पुरस्कार हर वर्ष दिया जाता है। इसमें एक श्रेणी , जिसे सार्वजनिक सेवा केटेगरी कहा जाता है , में ऐसा भी है जिसमें नकद पुरूस्कार नहीं मिलता लेकिन इसमें गोलड मैडल प्रदान किया जाता है।

पुलित्ज़र पुरूस्कार ( Pulitzer Prize ) के विजेताओं की घोषणा सोमवार को वाशिंगटन में की गयी है। इस में पत्रकारिता , संगीत , ड्रामा , किताबें की श्रेणी में विजेताओं की सूची को जारी किया है। इस बार फीचर फोटोग्राफी की श्रेणी में 4 भारतीयों पुलित्ज़र अवार्ड दिया गया है। इनमे से एक फोटोग्राफर दानिश सिद्दीकी को ये पुरूस्कार मरणोपरांत दिया जा रहा है। बता दें की इनकी मौत  पिछले साल अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता पर कब्जे के दौरान हुए संघर्ष के कवरेज के दौरान गोली लगने से हो गयी थी।

कौन है दानिश सिद्दीकी

दिवंगत दानिश सिद्दीकी राइटर्स समाचार एजेंसी से जुड़े फोटोग्राफर पत्रकार हैं। जिनकी मृत्यु पिछले साल अफ़ग़ान विशेष बलों और तालिबान विद्रोहियों के बीच संघर्ष को कवर करते हुए गोली लगने से हो गयी थी । इन्हे वर्ष 2022 के पुलित्ज़र प्राइज के लिए चुना गया है। आप को जानकारी दे दें की ये उनका दूसरा पुलित्ज़र प्राइज है। इस से पहले उनको वर्ष 2018 में  रोहिंग्या संकट के कवरेज करने हेतु रॉयटर्स टीम के हिस्से के रूप में प्रदान किया गया था। बता दें कि दिवंगत दानिश सिद्दीकी ने हांगकांग विरोध और एशिया, अफगानिस्तान संघर्ष, नेपाल में भूकंप संबंधी तसवीरें और मध्य पूर्व और यूरोप की अन्य प्रमुख घटनाओं को व्यापक रूप से कवर किया था।

बता दें कि दानिश सिद्दीक़ी ने जामिया मिलिया इस्लामिया , दिल्ली से अर्थशास्त्र में स्नातक किया था। जिस के बाद उन्होंने इसी कॉलेज से ही एजेके मास कम्यूनिकेशन रिसर्च सेंटर से 2007 से डिग्री ली। यहाँ से शिक्षा पूर्ण करने के बाद उन्होंने टीवी न्यूज़ एंकर यानी संवाददाता के तौर पर काम करना शुरू किया। इसके बाद उन्होंने फोटो पत्रकारिता की ओर रुख किया और फिर रॉयटर्स में इंटर्न के रूप में 2010 में ज्वाइन कर लिया। और अपने जीवनकाल के अंतिम समय तक उसी से जुड़े थे।

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तस्वीरें जिनके लिए मिला पुलित्ज़र

कोरोना काल के समय दानिश सिद्दीकी ने एक ऐसी तस्वीर ली थी जिसे देखकर उस दौरान के भयानक मंजर याद आ जाते हैं। ये तस्वीर है दिल्ली के एक श्मशान घाट की। इसमें एक तरफ आवासीय कॉलोनी और जहां बगल में एक साथ बहुत सारी चिताएं जलती दिखाई दे रही हैं।

pulitzer winning photo
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इस के अतिरिक्त एक अन्य फोटो में देख सकते हैं कि कैसे उस संकट काल में मृत्यु उपरान्त मृतकों की अस्थियां शवदाह गृह में रखी गयी थी। जो कि विसर्जित नहीं की जा सकी थी और वजह थी देश भर में लगा लॉक डाउन , जिस के चलते रिश्तेदार अस्थियां विसर्जित नहीं कर पा रहे थे।

कोविड लॉकडाउन में शवदाह गृह में रखी अस्थियां
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