CBSE Board Exam 2022: सीबीएसई बोर्ड के छात्रों के लिए खुशखबरी! सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की ये मार्क्स पॉलिसी

CBSE Board Exam 2022: सीबीएससी बोर्ड (CBSE Board) के छात्रों के लिए एक अच्छी खबर है। बता दें की शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के विद्यार्थियों के लिए एक राहत भरा फैसला लिया है। बता दें की कोर्ट ने अपने फैसले में सीबीएसई के एक मार्क्स पालिसी को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार की पीठ के अनुसार CBSE Board ने इस मार्क्स नीति के पीछे कोई तर्क नहीं दिया है और इस मार्क्स नीति का औचित्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला सभी CBSE Board Exam 2022 (कक्षा 10वीं और कक्षा 12वीं) के विद्यार्थियों के लिए फायदेमंद होगा।

सीबीएसई बोर्ड के छात्रों के लिए खुशखबरी!

CBSE Board Exam 2022 के सभी विद्यार्थियों के हित में सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने ये निर्णय लिया है की सुधार परीक्षा से संबंधित मार्क्स नीति में बदलाव करना आवश्यक है। उन्होंने वर्तमान मार्क्स नीति को खारिज कर पूर्व में चलने वाली नीति को ही लागू करने को कहा है। जिससे छात्र अपने बोर्ड परीक्षा और सुधार परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर अपने मार्क्स का चुनाव कर सकेंगे। बता दें की अब कोर्ट द्वारा दिए गए इस फैसले को वर्तमान वर्ष से ही लागू किया जाएगा। जिसका अर्थ हुआ की इस बार CBSE Board Exam 2022 में बैठने वाले सभी कक्षा 10 और कक्षा 12 के विद्यार्थियों को इस बार अपने बेस्ट मार्क्स को चुनने का अवसर मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की ये मार्क्स पॉलिसी

सुप्रीम कोर्ट द्वारा उस मार्क्स पालिसी को रद्द किया गया है जिसके अनुसार बोर्ड परीक्षाओं के बाद होने वाली सुधार परीक्षाओं में प्राप्त किये गए अंक ही मान्य होंगे। ऐसे में उन विद्यार्थियों का नुकसान हो जाता है जिन के सुधार की परीक्षा में अंक कम हो जाते हैं। इस नीति के अनुसार उन छात्रों को इन्ही अंकों के साथ संतोष करना पड़ता। लेकिन 7 जनवरी 2022 को सुप्रीम कोर्ट के इस नियम को ख़ारिज करने के बाद अब सभी छात्रों के पास ये अधिकार होगा की वो अपनी सुविधा से अपने बेस्ट मार्क्स को चुन सकते हैं। फिर चाहे उन्हें मुख्य परीक्षा में प्राप्त अंक को चुनना हो या फिर सुधार परीक्षा के अंकों को।

बेस्ट मार्क्स के चुनाव का अधिकार होगा विद्यार्थियों के पास

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई कर रही बेंच ने कहा की सीबीएससी ने सुधर परीक्षा में मिले अंकों को ही अंतिम मानने की नीति के पीछे कोई तर्क नहीं दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले पर कहा की यदि छात्रों को मुख्य परीक्षा में मिले अंकों को ही चुनना है तो उन्हें इस का अधिकार दिया जाएगा। ऐसा इसलिए ठीक है क्यूंकि यदि छात्र सुधार की परीक्षा देता है और उस के अंक कम हो जाते हैं तो ऐसे में विद्यार्थियों को आगे एडमिशन लेने में दिक्कत हो सकती है। इसलिए बेहतर यही है की छात्रों को उनके बेहतर अंकों के चुनाव का अधिकार हो।

जानकारी के लिए बता दें की पहले ही बोड में यही नीति थी जिसे बाद में बदलने के बाद वर्तमान नीति की शुरुआत की गयी थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पहले वाली नीति ही लागू करने का निर्देश दिया है जिससे छात्रों को आगे की पढाई के लिए भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी न हो। अब से विद्यार्थियों के बेहतर अंकों को ही फाइनल रिपोर्ट कार्ड में रखा जाएगा।

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