Bad Bank हो गया तैयार, आम आदमी को होगा फायदा, पढ़ें इससे जुड़ी सभी काम की बातें

Bad Bank: अब बैंकों को अपने फँसे हुए कर्ज को लेकर चिंता करने की जरुरत नहीं है क्यूंकि उसकी इस चिंता को दूर करने के लिए अगले महीने के दूसरे हफ्ते में Bad Bank शुरू किया जा रहा है. Bad Bank के अस्तित्व में आने के बाद बैंक इससे एकमुश्त लाभ ले सकेंगे. आपको बता दे की सरकारी आंकड़ों के हिसाब से अभी तक सरकारी बैंकों के 22 खातों में लगभग 82,000 करोड़ रुपए का लोन फँसा हुआ है जिसे वसूलने के लिए अब Bad Bank का सहारा लिया जायेगा. एनपीए (Non-Performing Asset) से जूझ रहे बैंको के लिए ये राहत भरी खबर है क्यूंकि अब उन्हें अपने बैड लोन (Bad loan) के लिए माथापच्ची करने की जरुरत नहीं. इससे बैंको को ग्राहकों को नया कर्ज देने में भी आसानी होगी.

बैड बैंक (Bad Bank), बैंको को मिलेगी राहत

बैड बैंक (Bad Bank) को देश के बैंको में पड़े बैड एसेट (Bad Asset) को गुड एसेट (Good Asset) में बदलने के लिए शुरू किया गया है. आपको बता दे की इस समय देश के सरकारी बैंको में 22 खातों में करीब 82 हजार करोड़ का एनपीए (Non-Performing Asset) फॅसा हुआ है जिससे की इन बैंको की बैलेंस शीट ख़राब होती है साथ ही इन्हे कस्टमरों को कर्ज देने में भी समस्या आती है. सरल शब्दो में कहें तो बैड बैंक का काम एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (ACR) की तरह होगा जो की बैंको के बैड एसेट को लेकर उसे गुड एसेट में बदलने का काम करेगा.

देश में हाल ही में कई बिजनेसमैन बैंको से कर्ज लेकर फरार हो गए थे जिससे की ना सिर्फ सरकार को आलोचना झेलनी पड़ी बल्कि बैंको का एनपीए (Non-Performing Asset) भी बढ़ गया था हालांकि अब बैड बैंक के आने के बाद इन सब चीजों पर लगाम लगने के आसार है क्यूंकि ऐसे मामलो का निपटारा अब बैड बैंक के द्वारा ही किया जायेगा.

समझें एनपीए का पूरा गणित

बैड बैंक कुल मिलकर बैंकों के एनपीए को खत्म करने के लिए ही शुरू किया गया है. पर आखिर ये एनपीए होता क्या है ? आपको बता दें की एनपीए का मतलब होता है Non-Performing Asset, आरबीआई के मुताबित वह एसेट जो की बैंक को किसी भी तरह का मुनाफा नहीं देती उसे Non-Performing Asset की श्रेणी में रखा जाता है. इसके लिए आरबीआई द्वारा 180 दिनों की समय-सीमा रखी गयी है. अगर कोई व्यक्ति या संस्था किसी बैंक से कोई कर्ज लेती है और किसी कारण से वह उसे समयसीमा में चुका नहीं पाते तो इस कर्ज को Non-Performing Asset में गिना जाता है.

इस समय देश के बैंकों में कुल 8.5 फीसदी का एनपीए फॅसा हुआ है जिसका की आरबीआई द्वारा मार्च माह तक बढ़कर 12.5 फीसदी होने की संभावना है. इससे बैंकों की मुश्किलें और बढ़ेंगी.

बैड बैंक, ये है फायदे

अगर इस समय देश के बैंको की स्थिति देखे तो इनमे से अधिकतर सरकारी बैंक एनपीए के जाल में फॅसे हुए नजर आते है जिसका कारण वित्तीय अनियमितता है. Bad Bank संचालन में आने के बाद इन सभी बैंकों का एनपीए ले लेगा जिससे की इन्हे निम्न फायदे होंगें.

  • बैंकों की बैलेंस शीट साफ़-सुथरी होगी जिससे की उन्हें एनपीए से राहत मिलेगी.
  • बैंको को एनपीए को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है.
  • NPA से मुक्ति पाने के बाद वे आसानी से ग्राहकों को लोन दे सकेंगे.
  • इससे निवेश के नए रास्ते भी खुलेंगे.
  • सरकार आसानी से सरकारी बैंको का प्राइवेटाइजेशन कर सकती है.

ऐसी ही और भी सरकारी व गैर सरकारी योजनाओं की जानकारी पाने के लिए हमारी वेबसाइट pmmodiyojanaye.in को बुकमार्क जरूर करें ।

Leave a Comment